इस सीट पर बीजेपी की प्रज्ञा ठाकुर और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के बीच सीधा मुक़ाबला है. 2014 में हुए चुनाव में बीजेपी के आलोक संजर ने यहां से
जीत हासिल की थी. इस सीट से जीत कर कांग्रेस के शंकरदयाल शर्मा (पूर्व
राष्ट्रपति), बीजेपी की उमा भारती, सुशील चंद्र वर्मा और कैलाश जोशी कभी
संसद पहुंचे थे. बीजेपी प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर इस चुनाव के दौरान बहुत
विवादों में रही हैं. उन्हें मालेगांव बम ब्लास्ट मामले के एक अभियुक्त के
तौर पर जाना जाता है. साध्वी प्रज्ञा ने पत्रकारों से बात करते हुए दिग्विजय सिंह को देश का दुश्मन बताया. उन्होंने कहा, "मैं देश के दुश्मनों
के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए तैयार हूं." इसके अलावा भी उन्होंने कई ऐसे बयान दिये जिस पर बहुत विवाद हुआ. इसमें से एक था "नाथूराम गोडसे को देशभक्त"
बताना.
गुना
2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस सीट से जीत हासिल की थी. इस बार फिर वो मैदान में हैं. यहां मुक़ाबला सिंधिया और बीजेपी के डॉ. केपी यादव के बीच है. तीन पीढ़ियों से गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया घराना जीतता आया है. ग्वालियर के बाद गुना ही वह सीट है, जहां से सिंधिया परिवार चुनाव लड़ना पसंद करता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया ने यहां से निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था.
2014 के चुनाव में बीजेपी ने महाराष्ट्र की 23 सीटों पर और शिवसेना 18 सीटों पर जीत हासिल की थी. कांग्रेस को 2 सीटों और एनसीपी को चार सीटों पर कामयाबी मिली थी.
बारामती
महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट पर 2014 के चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने जीत दर्ज की थी. यह लोकसभा सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार और उनके परिवार के लिए जानी जाती है. बारामती सीट से शरद पवार 6 बार सांसद बने उसके बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले 2 बार से सांसद हैं. एक बार शरद पवार के भतीजे अजीत पवार भी इसी सीट से सांसद बन चुके हैं. बीते 27 सालों से इस सीट पर पवार परिवार का एकछत्र राज है. 2014 के मोदी लहर में भी पवार परिवार ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. इस बार सुप्रिया का मुकाबला बीजेपी के सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपीएस) और दौंद विधानसभा सीट से विधायक राहुल कूल की पत्नी कंचन कूल से होगा, जो बीजेपी के चुनाव चिह्न पर मैदान में हैं.
छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश की हाईप्रोफ़ाइल सीटों में से एक है. यहां से मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल कमल नाथ चुनावी मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ ज्ञानेश्वर गजभिए (बहुजन समाज पार्टी), नाथनसाहा कुरैती (भारतीय जनता पार्टी), मनमोहन शाह बट्टी (अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी), एडवोकेट राजकुमार सरयाम (गोंडवाना गणतंत्र पार्टी), राजेश तांत्रिक (अहिंसा समाज पार्टी), एमपी विश्वकर्मा (राष्ट्रीय आमजन पार्टी) चुनाव लड़ रहे हैं. यह सीट कमलनाथ का गढ़ रहा है. कमलनाथ साल 1980 से इस सीट से लोकसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं. छिंदवाड़ा की जनता ने कमलनाथ को सिर्फ एक बार निराश किया है, जब 1997 में वे यहां से हारे थे.
गुना
2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस सीट से जीत हासिल की थी. इस बार फिर वो मैदान में हैं. यहां मुक़ाबला सिंधिया और बीजेपी के डॉ. केपी यादव के बीच है. तीन पीढ़ियों से गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया घराना जीतता आया है. ग्वालियर के बाद गुना ही वह सीट है, जहां से सिंधिया परिवार चुनाव लड़ना पसंद करता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया ने यहां से निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था.
2014 के चुनाव में बीजेपी ने महाराष्ट्र की 23 सीटों पर और शिवसेना 18 सीटों पर जीत हासिल की थी. कांग्रेस को 2 सीटों और एनसीपी को चार सीटों पर कामयाबी मिली थी.
बारामती
महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट पर 2014 के चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने जीत दर्ज की थी. यह लोकसभा सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार और उनके परिवार के लिए जानी जाती है. बारामती सीट से शरद पवार 6 बार सांसद बने उसके बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले 2 बार से सांसद हैं. एक बार शरद पवार के भतीजे अजीत पवार भी इसी सीट से सांसद बन चुके हैं. बीते 27 सालों से इस सीट पर पवार परिवार का एकछत्र राज है. 2014 के मोदी लहर में भी पवार परिवार ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. इस बार सुप्रिया का मुकाबला बीजेपी के सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपीएस) और दौंद विधानसभा सीट से विधायक राहुल कूल की पत्नी कंचन कूल से होगा, जो बीजेपी के चुनाव चिह्न पर मैदान में हैं.
छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश की हाईप्रोफ़ाइल सीटों में से एक है. यहां से मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल कमल नाथ चुनावी मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ ज्ञानेश्वर गजभिए (बहुजन समाज पार्टी), नाथनसाहा कुरैती (भारतीय जनता पार्टी), मनमोहन शाह बट्टी (अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी), एडवोकेट राजकुमार सरयाम (गोंडवाना गणतंत्र पार्टी), राजेश तांत्रिक (अहिंसा समाज पार्टी), एमपी विश्वकर्मा (राष्ट्रीय आमजन पार्टी) चुनाव लड़ रहे हैं. यह सीट कमलनाथ का गढ़ रहा है. कमलनाथ साल 1980 से इस सीट से लोकसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं. छिंदवाड़ा की जनता ने कमलनाथ को सिर्फ एक बार निराश किया है, जब 1997 में वे यहां से हारे थे.
No comments:
Post a Comment